Skip to Content

Languages

विश्वबंधुत्व दिवस सागर

Universal Brotherhood Day Sagarसागर में  स्वामी विवेकानन्द की भव्य प्रतिमा का अनावरण हुआ। अनावरित प्रतिमा को ग्वालियर के जानेमाने मूर्तिकार श्री प्रशान्त राय ने पीतल और तांवे की धातु से 11 फीट ऊँची एवं 1400 किलो वजनी सुन्दर एवं आकर्षित मूर्ति का निर्माण पाँच माह में किया। 11 लाख 70 हजार रूपये से निर्मित मूर्ति नगर पालिक निगम सागर के पूर्व एल्डर मेन श्री ओमप्रकाश दुबे के अथक प्रयास से निर्मित हुई।

शिकागो व्याख्यान दिवस के अवसर पर ११ सितम्बर २०१७ को विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी शाखा सागर एवं नगर पालिक निगम सागर के संयुक्त तत्वावधान में विश्वबन्धुत्व दिवस कार्यक्रम का आयोजन कर स्वामी विवेकानन्द की प्रतिमा का अनावरण किया गया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश शासन के गृह एवं परिवहन मंत्री माननीय श्री भूपेन्द्र सिंह के मुख्य आतिथ्य में, विधायक श्री शैलेन्द्र जैन के विशिष्ट आतिथ्य में, निगमाध्यक्ष श्री राजबहादूर सिंह, निगमायुक्त श्री अनुराग वर्मा (आई.ए.एस.) विवेकानन्द केन्द्र मध्य प्रान्त प्रमुख श्री भवंर सिंह राजपूत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त कार्यवाह श्री सुनील देव, कबीर आश्रम से आचार्य श्री रामजीवन दास एवं योग गुरू श्री विष्णु आर्य जी की उपस्थिति में द्वीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। 

स्वागत उद्वोधन में श्री राजबहादुर सिंह ने कहा की यह सागर वासियों के लिए सुखद क्षण है कि स्वामी विवेकानन्द की शिकागो वक्तृता के 125 वे वर्ष गांठ पर सागर नगर के  ऐसे स्थान पर प्रतिमा स्थापित की गई, जहाँ से प्रतिदिन लगभग 10 हजार युवा विद्यार्थीओं का आवागमन होता है। मुख्य वक्ता श्री भंवर सिंह राजपुत ने अपने उद्वोधन में कहा कि जिस प्रकार भिन्न भिन्न मार्गों से निकल कर नदियाँ अपना गन्तव्य तय करते हुए सागर मिल जाती है, उसी प्रकार विश्व में हिन्दु धर्म है, जिसने विश्व की सभी धर्मों को समाहित कर लिया है। स्वामी विवेकानन्द के पांच मिनट के वक्तव्य में भारत के प्रति विश्व के दृष्टिकोण को बदल कर रख दिया।

श्री भूपेन्द्र सिंह गृह एवं परिवहन मत्री ने कहा कि भारत भूमि वह भूमि है जिसने विवेकानन्द जैसे महापुरूषों का जन्म हुआ। भारत एक ऐसी संस्कृति है जिसने सभी को स्वीकारा है। स्वामी जी ने अपने ज्वलन्त विचारों से युवाओं को प्रेरित करने का कार्य किया है। श्री शैलेन्द्र जैन विधायक ने कहा आज समाज को स्वामी विवेकानन्द के विचारों के अनुरूप कार्य करने की आवश्यकता है। जिससे समाज में उत्पन्न समस्त भेद भावों को दूर किया जा सकता है। हम सदा स्वामी जी के ऋणी है, जिन्होंने हमें श्रेष्ठ मार्ग प्रशस्त किया। अतिथियों द्वारा पुस्तक का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में जिनके ओजस्वी वचनों से गीत की प्रस्तुती श्री नरेन्द्र चैरसिया ने एवं विवेक वाणी केन्द्र कार्यकत्र्ता रामनन्दन ने की, वहीं केन्द्र का परिचय नगर संगठक श्री संतोष ने दिया। नगर पालिक निगम सागर के पूर्व एल्डरमेन श्री ओमप्रकाश दुबे ने सभी का आभार माना। कार्यक्रम में 875 लोग उपस्थित रहे।